रविवार, मई 03, 2026

मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको









अदम गोंडवी साहब की रचना 

आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को
मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको

जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब कर
मर गई फुलिया बिचारी कि कुएँ में डूब कर

है सधी सिर पर बिनौली कंडियों की टोकरी
आ रही है सामने से हरखुआ की छोकरी

चल रही है छंद के आयाम को देती दिशा
मैं इसे कहता हूं सरजूपार की मोनालिसा

कैसी यह भयभीत है हिरनी-सी घबराई हुई
लग रही जैसे कली बेला की कुम्हलाई हुई

कल को यह वाचाल थी पर आज कैसी मौन है
जानते हो इसकी ख़ामोशी का कारण कौन है

1 टिप्पणी:

  1. मित्रों अदम गोंडवी हमारे जमाने के बड़े मशहूर शायर रहे हैं और उनका बहुत नाम है उनके कितने ही शेर बड़े मशहूर हैं काजू भुनी प्लेट में व्हिस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में यह तो सबको याद होगा उनकी यह मशहूर रचना है

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