बुधवार, अप्रैल 22, 2026

नासिर अहमद सिकंदर-विफल प्रेम की कविताएँ – -चार

चार


जब स्कूल में
बच्चों को तुम पढ़ाती होगी
शरद कोकास के कंप्यूटर पर नासिर अहमद सिकंदर 


पहला अक्षर अनार
तो याद आता होगा
तुम्हारे गालों को
मैंने कभी कहा था- अनार
गिनती सिखाते वक्त बच्चों को

जब छब्बीस में पहुंचती होगी तुम .
हो याद आता होगा |
तुम्हारी इसी उम्र में
मुलाकात हुई थी अपनी

बच्चों को तुम
प्रेम का समानार्थी शब्द
न बता पाती होगी अब

या जीत का विरुद्धार्थी शब्द
मुश्किल से बता पाती होगी

प्रस्तुति :शरद कोकास 

नासिर अहमद सिकंदर -विफल प्रेम की कविताएँ – -तीन

तीन


चांद कहाना
पसंद न था उसे

फूल कहता
तब भी चिढ़ जाती

कोयल कहता
तो कहती..उंह
काली काली कोयल
उफ़ चिड़िया
तब भी चुप

थक हारकर अपना कहता
यही कहना - कहाना
पसंद था उससे.

नासिर अहमद सिकंदर -विफल प्रेम की कविताएँ- दो

 दो

समुद्र के पास जाऊंगा एक दिन 

तुम्हारी आंखों के लिये
भीख में मांगूगा
उसके जल का नीलापन

चांद के पास जाऊंगा एक दिन
उससे कहूँगा
उतर आये तुम्हारे चेहरे में
अपने जिस्म से
नसें निकालूंगा एक दिन
उनमें पिरोऊंगा तारे
और चेन की जगह
डाल दूँगा गले में

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नासिर अहमद सिकंदर - विफल प्रेम की कविताएँ – -एक

एक


मुझे उसके बाल बहुत पसंद थे

उसके बाल इतने घने और लंबे थे
कि उन्हें फैलाकर और तानकर
बनाया जा सकता था
एक आसमान

उसके बालों से
बनाई जा सकती थी एक छत
और रहा जा सकता था उम्र भर

फांसी का फंदा भी तो हो सकते थे बाल

उसके बाल इतने नर्म और मुलायम थे
कि यह हो ही नहीं सकता था

मुझे उसके बाल बहुत पसंद थे


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