बुधवार, फ़रवरी 02, 2011

एक नये रास्ते की सम्भावना भी यहीं से शुरू होती है

एकांत श्रीवास्तव 
       मेरे कवि मित्र एकांत श्रीवास्तव ने जब पहली बार यह कविता सुनी थी तो उन्हे यह कविता बहुत पसन्द आई  थी .. सो यह कविता एकांत के लिये , और आप सभी के लिये ..जो जीवन की राहों पर चल रहे हैं और सामना कर रहे हैं हर आने वाले मोड़ का .. 

 मोड़

मोड़ बहुत हैं
जीवन की राह पर
अनदेखे अनचीन्हे मोड़

सपाट रास्तों से उपजी
ऊब तोड़ते हैं मोड़
मोड़ पर साफ दिखाई देता है
तय किया रास्ता
आनेवाला दृश्य
मोड़ पर बदल जाती है
हवा की दिशा
बदल जाता है
धूप का पहलू
बारिश का कोण

कभी अचानक आते हैं मोड़
कभी मिल जाता आभास
कभी कोई दिशा संकेत
सावधान करते हैं मोड़

मोड़ पर अक्सर ठिठक जाते लोग
गति हो जाती कम
टूट जाती लय
रुकने की सम्भावना होती मोड़ पर
टकरा जाने की भी
थक जाने की सम्भावना होती है
भटक जाने की

एक नये रास्ते की सम्भावना भी
यहीं से शुरू होती है ।

                        - शरद कोकास  

( चित्र गूगल से साभार )

28 टिप्‍पणियां:

  1. bahut dino bad koi ek achhi kavita padhi

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  2. हर शय में इक दर्शन छुपा है
    कहीं मोड़ कहीं अंधेरी गुफा है।

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  3. कविता वाकई में ही सुंदर है. एकांत जी की तरह मैं भी फैन हो गयी.

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  4. न जाने क्यों जब अधिक मोड़ आने लगे तो चुपचाप बैठ कर सुस्ताना अच्छा लगता है।

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  5. एक नये रास्ते की सम्भावना भी
    यहीं से शुरू होती है ।

    सही कहा………जीवन दर्शन करा दिया।

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  6. शरद जी
    नमस्कार !
    एकांत जी को भी नमस्कार .
    जो हमे इतनी सुंदर कविता पढने को मिली , शरद जी '' मोड़ वही ख़तम होता है जहा एक नया मोड़ आता है ''
    बेहद सुंदर ,
    साधुवाद !

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  7. एकांत के लिए समर्पित कविता एकांत में ही पढ़ी :)
    कविता हमें भी पसंद आई !

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  8. बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  9. `यह कविता एकांत के लिये ,....'
    तो हम एकांत में पढेंगे :)

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  10. एक नये रास्ते की सम्भावना भी
    यहीं से शुरू होती है ।

    कविता का शिल्प और कथ्य दोनों अनूठे हैं।

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  11. अध्भुत शिल्प और कथ्य के साथ कविता परोसने हेतु....आप सभी का आभार

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  12. एक नये रास्ते की सम्भावना भी
    यहीं से शुरू होती है ।
    सचमुच.......
    बहुत अच्छी लगी कविता शरद जी. धन्यवाद !

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  13. मोड़ पर अक्सर ठिठक जाते लोग
    गति हो जाती कम
    टूट जाती लय
    रुकने की सम्भावना होती मोड़ पर
    टकरा जाने की भी
    थक जाने की सम्भावना होती है
    भटक जाने की

    एक नये रास्ते की सम्भावना भी
    यहीं से शुरू होती है ।
    wakai kavita bahut achchhi hai

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  14. वाह..क्या मोड है... बहुत अच्छी कविता...

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  15. 'मोड' ने हमेशा मुझे जिज्ञासु रखा है, व्यक्ति के लिये मोड उसका परिवर्तन होता है..नई दिशा..। इस कविता में भी यही है और मोड का अपनेआप में बना एक रहस्य भी उगलती है..। सबकुछ तो बदलता है..

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  16. मोड़ पर कुछः नया और बेहतर होने की अनेकों संभावनाएं जगा दी हैं कविता ने...

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  17. बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

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  18. गहन अर्थों को समेटती एक खूबसूरत और भाव प्रवण रचना. आभार.
    आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!
    सादर,
    डोरोथी.

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  19. एक नये रास्ते की सम्भावना भी
    यहीं से शुरू होती है
    kitni achchi baat likhe hain....

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  20. सत्य कहा...

    भावपूर्ण बहुत ही सुन्दर कविता...

    आनंद आया पढ़कर...

    आभार..

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