शुक्रवार, दिसंबर 24, 2010

वह सचमुच अभी बच्चा है ।

सर्दियों की रात में अजीब सी खामोशी सब ओर व्याप्त होती है । टी.वी. और कम्प्यूटर और पंखे बंद हो जाने के बाद बिस्तर पर लेटकर कुछ सुनने की कोशिश करता हूँ ।  हवा का कोई हल्का सा झोंका कानों के पास कुछ गुनगुना जाता है । गली से गुजरता है कोई शख्स गाता हुआ ...आजा मैं हवाओं में उठा के ले चलूँ ..तू ही तो मेरी दोस्त है । मैं सोचता हूँ मेरा दोस्त कौन है ..यह संगीत ही ना जो रात दिन मेरे कानों में गूँजता रहता है । संगीत के दीवानों के लिये  दुनिया की हर आवाज़ में शामिल होता है संगीत .. ऐसे ही कभी दीवाने पन में मैंने भी कोशिश की थी इस संगीत को तलाशने की । मेरी वह तलाश इस कविता में मौज़ूद है जो मैंने शायद युद्ध के दिनों में लिखी थी ... 

संगीत की तलाश

मैं तलाशता हूँ संगीत
गली से गुजरते हुए
तांगे में जुते घोड़े की टापों में

मैं ढूँढता हूँ संगीत
घन चलाते हुए
लुहार के गले से निकली हुंकार में

रातों को किर्र किर्र करते
झींगुरों की ओर
ताकता हूँ अन्धेरे में
कोशिश करता हूँ सुनने की
वे क्या गाते हैं

टूटे खपरैलों के नीचे रखे
बर्तनो में टपकने वाले
पानी की टप-टप में
तेली के घाने की चूँ-चूँ चर्र चर्र में
चक्की की खड़-खड़ में
रेलगाड़ी की आवाज़ में
स्वर मिलाते हुए
गाता हूँ गुनगुनाता हूँ

टूट जाता है मेरा ताल
लय टूट जाती है
जब अचानक आसमान से
गुजरता है कोई बमवर्षक
वीभत्स हो उठता है मेरा संगीत
चांदमारी से आती है जब
गोलियाँ चलने की आवाज़
मेरा बच्चा इन आवाज़ों को सुनकर
तालियाँ बजाता है
घर से बाहर निकलकर
देखता है आसमान की ओर
खुश होता है

वह सचमुच अभी बच्चा है ।

             -- शरद कोकास

39 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! अद्भुत ! बहुत कुछ कह दिया आपने इस कविता के माध्यम से…………गज़ब का इतफ़ाक है कि आज ऐसा ही कुछ मैने भी अपने ब्लोग पर लगाया है अगर वक्त मिले तो पढियेगा।
    http://ekprayas-vandana.blogspot.com
    मैने लिखा है नैसर्गिक संगीत सुना है कभी और यहाँ भी उसी संगीत की बात है बस मामूली सा ही फ़र्क है मगर भाव शायद आखिर मे जुदा हो गये।

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  2. सचमुच,बच्चा होने पर बिना फल या प्रभाव की चिंता किये किसी भी बात का मजा लिया जा सकता है.
    घुघूती बासूती

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  3. बहुत बहुत बहुत जबर्दस्त्त कविता ..एक एक भाव एक एक शब्द में अद्भुत ढंग से परिवर्तित होता हुआ.
    बहुत ही अच्छी लगी आपकी यह कविता.

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. अब बच्‍चा टीवी पर देखता है, आतिशबाजी.

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  6. हर गति में संगीत है, आप ढूढ़ सकें तो ढूढ़ लें। सुन्दर अवलोकन।

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  7. जीवन की हर लय में संगीत है... पर वो भावी मृत्यु के शोर से भंग हो जाता है... बच्चा ये नहीं समझता ना कि शोर क्या है और संगीत क्या.

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  8. संवेदनशील मन तो हर जगह संगीत ढूंढ लेता है....
    चाहे वह झींगुर की किर्र किर्र हो या टपकते पानी की टप -टप,
    पर ये गोली-बारी और बम सारे संगीत ख़त्म करने को आमादा
    कब तक रहने देंगे उस बच्चे का बचपन भी जिंदा...

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  9. बच्चा जब तक बच्चा है ताली बजा सकता है गोली की आवाज़ पर ...क्यों कि वो बम के धमाके ओर पटाखों की आवाज़ में अन्तर नहीं कर पाता ...और हर प्राक्रतिक चीज़ों की आवाज़ में संगीत सुनाई देता है यह एक संवेदनशील मन की अनुभूति है ..

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  10. अल्फाज़ों की बाजीगरी में आपका कोई सानी नहीं है... बहुत संवेदनशील है.. हम जैसे कमज़ोर दिलवालों की आंखें घर को यादकर नम हो जाती हैं...

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  11. बहुत ही सुन्दर और बेहतरीन रचना!

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  12. आपकी इस रचना में आपके धरातल से जुड़े होने का अहसास हो रहा है ।
    एक कवि की संवेदनशीलता दृष्टिगोचर हो रही है ।
    कुछ ओशो की झलक भी दिख रही है ।
    उत्कृष्ट रचना ।

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  13. संगीत की लय के बाद बमवर्षक के गरजने से ध्यान भंग होता है। जैसे चलते चलते जीवन की गाड़ी पटरी से उतर जाती है और बच्चे को पता नहीं होता। क्या हूआ।

    सुंदर कविता के लिए आभार शरद भाई

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  14. बहुत सुन्दर लिखा है आपने... यह तो बच्चे ही हैं जो भयावहता और वीभत्सता में भी आनंद ढूंढ लेते हैं... बड़े तो आनंद वाली बातों में भी उदास होने का कारण ढूँढने में लगे रहते हैं...
    कोरिया में क्रिसमस

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  15. kabhi kabhi lagta hai blogs sirf frustrated log hi banaate hain, lekin aap ko dekh kar ye bhram bhi samaap ho jata hai.
    meine aapki bahut si kavitayen padi hain.......

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  16. क्रिसमस की शांति उल्लास और मेलप्रेम के
    आशीषमय उजास से
    आलोकित हो जीवन की हर दिशा
    क्रिसमस के आनंद से सुवासित हो
    जीवन का हर पथ.

    आपको सपरिवार क्रिसमस की ढेरों शुभ कामनाएं

    सादर
    डोरोथी

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  17. बच्चा श्रम संगीत और विध्वंस की राजनीति में भेद नहीं समझ पाता।
    कवि सुनता भी है, समझता भी है और महसूस भी करता है।
    ...अच्छी लगी कविता।

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  18. बाल हृदय कहाँ समझ पाता है इन दो तरह की आवाजों में भेद..
    एक संगीत है जो ज़ख्म भरता है एक वो गर्जना जो ज़ख्म देती है.
    गहन भाव लिए अच्छी रचना .

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  19. संगीत कहाँ नहीं है ...
    मगर बचपन कहाँ समझ पाता है इनका भेद ...
    बहुत बड़ी संख्या में बड़े भी समझ नहीं पा रहे हैं ,जो रचते हैं युद्ध की साजिशें , गिनते है लाशों के ढेर और कहकहे लगते हैं ..!

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  20. आप इतनी अच्छी कवितायें कैसे लिख पाते हैं ?

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  21. @ अली भाई , मेरी यह मान्यता है कि लेखन की प्रतिभा जन्मजात नहीं होती न ही इसे ईश्वर प्रदत्त मानता हूँ । इसके लिये अध्ययन की आवश्यकता होती है और बाकायदा प्रशिक्षण की । कुल मिलाकर जीवनानुभव को रचनानुभव में परिवर्तित करने की क्षमता का विकास । कुछ दिन हमारे साथ रहिये आप इससे बेहतर कवितायें लिखने लगेंगे ।

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  22. संगीत के संवेदनशील स्वरुप .... अंत में संगीत का वीभत्स्व रूप... एक वज्रपात की तरह....

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  23. बहुत ही गहन भावों के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  24. हर आवाज में संगीत है सुनने वाला चाहिये । सुंदर कविता का अन्त एकदम झकझोर के रख देता है । बच्चा बम की आवाज़ में भी संगीत (?) ढूँढ लेता है ..............।

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  25. बहुत ही सुन्दर .बधाई.नव वर्ष की शुभकामनाएँ.

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  26. गहन भावों की खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.

    अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
    तय हो सफ़र इस नए बरस का
    प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
    सुवासित हो हर पल जीवन का
    मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
    करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
    शांति उल्लास की
    आप पर और आपके प्रियजनो पर.

    आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर,
    डोरोथी.

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  27. नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें!

    पल पल करके दिन बीता दिन दिन करके साल।
    नया साल लाए खुशी सबको करे निहाल॥

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  28. मेरा बच्चा इन आवाज़ों को सुनकर
    तालियाँ बजाता है
    घर से बाहर निकलकर
    देखता है आसमान की ओर
    खुश होता है

    वह सचमुच अभी बच्चा है ।
    bahut hi gahre bhav samte hai ,sundar .nav barsh ki dhero shubhkaamnaaye aapko .

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  29. आपको और आपके परिवार को मेरी और मेरे परिवार की और से एक सुन्दर, सुखमय और समृद्ध नए साल की हार्दिक शुभकामना ! भगवान् से प्रार्थना है कि नया साल आप सबके लिए अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और शान्ति से परिपूर्ण हो !!

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  30. बहुत लाजवाब ... शरद जी ... आज के हालात पर सख्त टीका किया है आपने ...
    तेज़ी के इस मशीनी युग में ... दिल से सुन्नी वाली आवाजें गम हो गयी हैं ....
    नया साल बहुत बहुत मुबारक हो ...

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  31. गति है तो संगीत है
    हलचल में एक लय है
    और फिर बस नज़र चाहिये इस संगीत .. इस लय को महसूस कर सकने को ..

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  32. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  33. अभी तो कहिर वह बच्चा ही है, लेकिन उस बच्चे की लय, ताल,संगीत का सेंस, पूरा सौन्दर्य बोध हम से कुछ अलग ही होगा .... बल्कि हो गया है. जो कि भयावह है और चिंताजनक.
    प्रासंगिक कविता शरद भाई.

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  34. अल्फाज़ों की बाजीगरी में आपका कोई सानी नहीं है..

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