बुधवार, जून 10, 2020

देवताओं के वंशज


समुद्र मंथन के बाद
बचे हुए देवताओं के
तथाकथित वंशज
मानवता को मथते हुए
हवस के हाथों
बटोर रहे हैं
सोना- चांदी, महल - सिंहासन
अधिकार और कानून

उंडेल रहे हैं
आम आदमी के सपनों में
धर्म का खौफ़
भविष्य का भटकाव
भाग्यवाद का गरल

पुराणकथाओं से
उद्ध्रत करते हुए
दानवी अत्याचारों के प्रसंग
घूम रहे हैं खुले आम
आदमी के भेष में

वे जिनके उपदेशों की रोटी
बत्तीस बार चबाने पर
मीठी लगती है
वे जिनके पाँव
स्वार्थ की पूजा में
सिन्दूर लगे पत्थरों से बड़े हो जाते हैं

देवता का मुखौटा पहने
मायावी राहु केतुओं की
भीड़ बढ़ रही है
मनुष्य की कतारों में ।

-  शरद कोकास  

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 11.6.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3729 में दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज गुरुवार (11-06-2020) को     "बाँटो कुछ उपहार"      पर भी है।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. " बचे हुए देवताओं के
    तथाकथित वंशज "
    और ...
    " उंडेल रहे हैं
    आम आदमी के सपनों में
    धर्म का खौफ़
    भविष्य का भटकाव
    भाग्यवाद का गरल "
    बहुत सही आज के सुसभ्य और सुसंस्कृत कहे जाने वाली समाज की मानसिकता के शब्द-चित्रण की ...
    " विज्ञान को इधर तो मानते सब गौण
    और मन्दिर में है उधर पत्थर मौन " ...

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  4. छद्म रूप लिए हुए हे हर व्यक्ति
    बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  5. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे
    Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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