एक
मुझे उसके बाल बहुत पसंद थे
उसके बाल इतने घने और लंबे थे
कि उन्हें फैलाकर और तानकर
बनाया जा सकता था
एक आसमान
उसके बालों से
बनाई जा सकती थी एक छत
और रहा जा सकता था उम्र भर
फांसी का फंदा भी तो हो सकते थे बाल
उसके बाल इतने नर्म और मुलायम थे
कि यह हो ही नहीं सकता था
मुझे उसके बाल बहुत पसंद थे
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नासिर भाई को विनम्र श्रद्धांजलि के साथ उनकी यह कविता | नासिर भाई विगत २९ दिसंबर २०२५ को दुनिया से चले गए
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