गुरुवार, अप्रैल 16, 2009

जनतंत्र में अपने जन होने के अधिकार का अवश्य उपयोग करें


जनतंत्र में अपने जन होने के अधिकार का अवश्य उपयोग करें

शरद कोकास की सुख दुःख की कवितायें -इलेक्शन



शरद कोकास की कविता ' इलेक्शन'

दुःख का सीधा मुकाबला
सुख से था
सुख के पक्ष में सत्ता थी
मक्कारी थी
अय्यारी थी
दुःख को धूल चटवाने की
पूरी तय्यारी थी

सुख के कार्यकर्ताओं में
सौ बार बोले जा चुके झूठ थे
धोखा आतंक अनाचार थे
लोभ लालच उसके पिट्टू थे
अनीति उसकी प्रवक्ता थी
बेईमानी वित्तप्रबंधक
सुविधाएं उसकी गुलाम थी
सितारों की उस पर कृपा थी
आकाश मेहरबान था
सुख के झंडे पर
स्वप्न का निशान था

सुख की ताकत के आगे
लाचार था दुःख
अपने रोने के अलावा
उसके पास ऐसा कुछ नही था
जिससे वह सुख का मुकाबला करता
फ़िर भी दुःख ने संघर्ष किया
कोशिश की सुख से जीतने की
और हार गया
दुःख नही पहुंचा कुर्सी तक
सुख पहुँच गया