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बुधवार, अप्रैल 22, 2026

नासिर अहमद सिकंदर -विफल प्रेम की कविताएँ- दो

 

दो

समुद्र के पास जाऊंगा एक दिन 

तुम्हारी आंखों के लिये
भीख में मांगूगा
उसके जल का नीलापन

चांद के पास जाऊंगा एक दिन
उससे कहूँगा
उतर आये तुम्हारे चेहरे में
अपने जिस्म से
नसें निकालूंगा एक दिन
उनमें पिरोऊंगा तारे
और चेन की जगह
डाल दूँगा गले में

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