itihas to darasal ma ke pahale doodh ki tarah hai
jiski sahi khurak paidaa karti hamare bheetar
musibaton se ladne ki takat
dukh sahan karne ki kshamta deti jo
jeevan ki samajh banati hai vah
hamare hone ka arth batati hai hame
hamari pahchan karati jo hamin se
(PAHAL dwara prakashit SHARAD KOKAS ki lambi kavita PURATATVAVETTA se)
कविता ही ज़िन्दगी हो जहाँ ऐसी एक दुनिया है यहाँ...शरद कोकास कोश में पढ़िए शरद कोकास और मित्रों की कविताएँ और लेख
शनिवार, अप्रैल 11, 2009
ITIHAS KYA HAI?
शीर्षक
SAMWAAD
‘पहल’ पत्रिका में प्रकाशित लंबी कविता “पुरातत्त्ववेत्ता” और “देह” के लिए चर्चित कवि शरद कोकास की और दो लंबी कविताएँ “पुरुरवा उर्वशी की समय यात्रा” तथा परमाणु बम के अविष्कारक “ओपेनहाइमर” पर लिखी लम्बी कविता ‘समालोचन’ वेब पत्रिका में प्रकाशित हैं । उनके छह कविता संकलन प्रकाशित हैं 1."गुनगुनी धूप में बैठकर " 2. 'हमसे तो बेहतर हैं रंग' 3. 'अनकही' 4 'सुख एकम दुःख' 5 'बिजूका' 6. चयनित कविताएं । उनकी गद्य पुस्तकों में "मन मशीन" "एक पुरातत्त्ववेत्ता की डायरी" "बैतूल से भंडारा" और "कोकास परिवार की चिठ्ठियाँ" अमेज़न पर बेस्ट सेलर हैं । कवि,लेखक,ब्लॉगर,पॉडकास्टर,हिप्नो व साइको थेरेपिस्ट शरद कोकास बतौर मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग भी करते हैं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा अंधश्रद्धा निर्मूलन पर व्याख्यान देते हैं साथ ही फेसबुक,व्हाट्सएप,इन्स्टाग्राम,ट्विटर आदि पर भी सक्रिय हैं ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)