कविता ही ज़िन्दगी हो जहाँ ऐसी एक दुनिया है यहाँ...शरद कोकास कोश में पढ़िए शरद कोकास और मित्रों की कविताएँ और लेख
शुक्रवार, फ़रवरी 28, 2014
शीर्षक
कविता,
शरद कोकास,
हमसे तो बेहतर हैं रंग,
Dakhal Prakashan दख़ल प्रकाशन,
Delhi,
Hamse To Behatar Hain Rang,
poem,
sharad kokas
‘पहल’ पत्रिका में प्रकाशित लंबी कविता “पुरातत्त्ववेत्ता” और “देह” के लिए चर्चित कवि शरद कोकास की और दो लंबी कविताएँ “पुरुरवा उर्वशी की समय यात्रा” तथा परमाणु बम के अविष्कारक “ओपेनहाइमर” पर लिखी लम्बी कविता ‘समालोचन’ वेब पत्रिका में प्रकाशित हैं । उनके छह कविता संकलन प्रकाशित हैं 1."गुनगुनी धूप में बैठकर " 2. 'हमसे तो बेहतर हैं रंग' 3. 'अनकही' 4 'सुख एकम दुःख' 5 'बिजूका' 6. चयनित कविताएं । उनकी गद्य पुस्तकों में "मन मशीन" "एक पुरातत्त्ववेत्ता की डायरी" "बैतूल से भंडारा" और "कोकास परिवार की चिठ्ठियाँ" अमेज़न पर बेस्ट सेलर हैं । कवि,लेखक,ब्लॉगर,पॉडकास्टर,हिप्नो व साइको थेरेपिस्ट शरद कोकास बतौर मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग भी करते हैं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा अंधश्रद्धा निर्मूलन पर व्याख्यान देते हैं साथ ही फेसबुक,व्हाट्सएप,इन्स्टाग्राम,ट्विटर आदि पर भी सक्रिय हैं ।
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बहुत-बहुत बधाई आपको और पाठकों को भी ..।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद गिरिजा जी
हटाएंकाव्य संग्रह के लिए हार्दिक बधाई...
जवाब देंहटाएंनमोः नमः हे शम्भुनाथ, नमोः नमः हे सोमेश्वर !
महा शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें....................!!!!!!
धन्यवाद संजय , यह पुस्तक अब ऑनलाइन उपलब्ध है
हटाएंढेरों बधाई और शुभकामनायें।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद प्रवीण
हटाएंहार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई काव्य संग्रह के लिए
जवाब देंहटाएंधन्यवाद ललित भैया
हटाएंबहुत बहुत बधाई शरद जी ... हार्दिक शुभकामनायें ...
जवाब देंहटाएंधन्यवाद दिगम्बर जी ,ब्लॉग में तो बहुत पढ़ीं अब पुस्तक में भी आ गई हैं ...
हटाएंधन्यवाद शास्त्री जी
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत बधाई शरद जी।
जवाब देंहटाएंजहाँ न पहुचा रवि' बहाँ पहुचे कवि मित्र ।Seetamni. blogspot. in
जवाब देंहटाएंRose Day Gifts to India Online
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